Tuesday, November 11, 2014


रात के आसमान पे
दस्तक चाँद की
ठंडी हवा ने लिखी नज्म
बादलो के नाम की
भूले भटके
बरसते बादल
चाँदनी के आँखो मे
अफक का काजल
येह जादू है मौसम का
या सपना कोई
रुह को छू के
दिल मे बस गया अपना कोई
.
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बस अब जिद न करना
आँखे खोलने की...
बोल तो दिया आँखो से...
अब क्या जरुरत, लब्जो से बोलने की??

के पी आर

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