बापू ही होगे बटवारे का पहला बली
दोनो मुल्को मे मचेगी खलबली
माँ बहनो की ईज्जत चौराहोपर लुटेगी
अमन और शांती पल पल मिटेगी
मजहब के नाम पे दो मुल्क भिडेंगे
आजादी के बाद भी सालो साल लडेंगे
यह तो बडे दुःख की बात है भाई
ऐसी आजादी तो हमने न थी कभी चाही
बदलेगी हालत.. बदलेगा हिंदोस्ताँ
डॉ. बाबासाहब लिखेंगे स्वतंत्र भारत का संविधान
दुर्बलो को भी तब मिलेगा हक
भाईचारेसे रहेंगे सब
सबको मिलेगी शिक्षा, होगी हर धर्म की रक्षा
जमिन पे रह के छुएंगे आस्मान
ऐसे बढेगा हमारा हिदोस्ताँ...
यह तो है सिर्फ झलकी
बहोत खुश हुए हम सुन के बात कलकी
यह तो हुई शुरुवात की बात
मत भूलो दिन के बाद आती है रात
सरकार उठाएगी "ईमर्जन्सी" का हथियार
ईन्सानियत पे ऐसे ही चलता रहेगा वार
बयासी मे बहेगा इंदिरा का खून
पाप एक का पर किमत चुकाएगी पंजाब के खून की हरेक बूँद
अपनेही लोगो की होगी मार काट
और करो अब आजादी की बात
यह तो जैसे हुआ जंगलराज
कैसे पहनेंगे ये आजादी का ताज?
तूफान थमते थमते फिर जल उठेगा हिंदुस्ताँ
मजहब के नाम पे फिर मरेगा ईन्सान
कटगहरे मे होगे राम और अल्ला
रास्ते पे भिडेंगे पंडित और मुल्ला
मंदिर और मस्जिद के नाम पे लडाई
लोगो के आँखोमे धूल झोक के राजनेता देंगे एक दुसरे को बधाई
बोलेगी छुरी चलेगी गोली
अपनेही खेलेंगे खून की होली.
यह तो जनता के भावनाओ से होगी खिलवाड
राजनेताओ के सामने एकता होगी लाचार
आतंक के साये मे पलेगा हिंदोस्ताँ
झुकेगा उठेगा... सिखेगा हिंदोस्ताँ
आय.टी. ऑटोमोबाईल्स लाएंगे ग्लोबलाईझेशन की कमाई
गरीब लडेंगे जीने की लडाई
महंगाई मचाएगी चारो तरफ केहर
बेरोजगारी, खून, दहशतगर्दोका फेलेगा जहर
अच्छाई की यहा पे होगी बदनामी
सभी देंगे बुराई को सलामी
कभी कश्मीर, कभी लोकसभा तो कभी मुंबई का सिना होता रहेगा छलनी
सलाम कर के मुंबई को सब कहते रहेंगे शेरनी
खून, आतंक, स्मगलिंग सब सिने पे झेलेगी
दो हजार आठ मे फिर एकबार मुंबई जलेगी
झुलसता हिंदोस्ताँ सिसकती साँसे
नजाने कितनी जाने जाएंगी यहाँ पे
बिर्यानी खा के हसेगा कसाब
"अतिथी देवो भव" कहेगी सरकार, कौन करेगा ईन्साफ
मुंबई तो फिलहाल चलती ही रहेगी
सालो साल ऐसेही जलतीही रहेगी
महंगाई नजाने रुकेगी कब
आम आदमी को रोटी मिलेगी कब
आण्णा बाबा करेंगे महंगाई और भ्रष्टाचार का चक्का जाम
विरोधी पक्ष के भी बगल मे होगी छुरी और मुँह मे राम
सभी होंगे चट्टे बट्टे एकही थाली के
फिजा मे रंग चढेगा खुन की लाली से
किसानो गरिबो पे चलेगी लाठीया और मरेंगे वोह कुत्ते की मौत पुलिस की गोली से
स्कॅम, चोरी, डकैती, घूस का पैसा स्विस बँक मे पडेगा
आम आदमी दो वक्त की रोटी के लिए महंगाई से लडेगा
सबकुछ करके गुनाहोसे रहेंगे वोह अनजान
सबसे सस्ती होगी यहाँ पे लोगो की जान
उजले माथे से घुमेंगे यहा गुनहगार
आम आदमी ऐसेही बनता रहेगा लाचार
अपने ही करेंगे मुल्क से नमकहरामी
आजादी करेगी देशद्रोही और नेताओ की गुलामी
गिरेगा, टुँटेगा, सिसकेगा... पर हार ना मानेगा आम ईन्सान
बटवारे के सालो बाद भी बटता रहेगा हिंदोस्ताँ
कैसे पलेगा, चलेगा, जितेगा.. कैसे बढेगा हिंदोस्ताँ.. कैसे बढेगा हिंदोस्ताँ!!
संकल्पना - राहुल मोहिते
शब्द - कुणाल प्रकाश रुद्राके

