उस सुनी गली का सन्नाटा...
चाँदनीने भी सुन लिया
चाँद ने हथेली पे
यादो को चुन लिया
आँखोसे भी झलकती है यादें वोही
बीते कल से टकराती है राहे नयी
तेरी आँखे आज भी
जानी पेहचानी लगती है
तेरे होठो की हसी अब तक
मेरी धडकन को ठगती है..
है रश्क तुम्हे मेरी खामोशी से
देख लेना एक दफा आँखो मे मेरी भी अपनी खुशीसे
पर न देखना ऐसे की
मै नजर चुरा लू..
दबा के रखी अल्फाजो मे जो बात
उसे आँखो से बता दू
अब तो खामोशी ही देती है हरदम साथ..
बताना चाहता हू तुम्हे भी एक ही बात..
अब के जाओगे तो मुड के न देखना फिर से..
सख्त नफरत है मुझे ऐसी झूठी उम्मीद से..
कुणाल प्रकाश रुद्राके
(ऊम्मीद का दामन न छोडना था हमे... हम तो मजबूर तब हुए, जब ऊम्मीदने दामन हमारा छोड दिया)
