Friday, June 23, 2017

याद है

कसमों में बंधे थे.. याद है?
कुछ तो याद होगा...
कुछ भी नहीं है तो..
अगर फिर कभी मिले तो पेहचानेंगे कैसे?
पहली बार मिले थे
तब भी तो अनजान नहीं थे
नजाने अब के मिलेंगे तो
अनजान कैसे होंगे
बतायेंगे नही
जतायेंगे नही
सिर्फ़ आँखों से छू लेंगे रुह को
वोह अनजाने, जो कभी
एक दुसरे की पेहचान हुवा करते थे
वोह जिन्हें याद तो सबकुछ है
लेकीन येह भूल गये है के
कुछ यादें न भुलायी जाती है न मिटायी
वोह दफ़्न होती है अपने साथ
देखना मेरी क़ब्र पे पौधा आयेगा... "फूलों का"
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वो भी येही पूछेगा तुम्हें एक दिन....
"याद है"?


केपी आर

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